आव बुन्देलखंडी बतियज्जे (Aaw Bundelkhandi batiyajje) आव बुन्देलखंडी बतियज्जे (Aaw Bundelkhandi batiyajje)
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आव बुन्देलखंडी बतियज्जे (Aaw Bundelkhandi batiyajje)

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बुंदेलखंड के भीषण सूखे का चित्रण दोहों के माध्यम से-
गाँव गाँव घूमो मगर, करो काम कुछ ख़ास ।
जनता व्याकुल हो रही, ज़रा बुझाओ प्यास ।।
उनको लगता है भला, मुझे लगे आघात।
भूखे प्यासे पेट से, ग्रामोदय की बात ।।
कैसे बोलूँ आपको, हो यदुकुल के अंश ।
पानी बिन दम तोड़ता, सड़कों पर गोवंश ।।
जीव जंतु पानी बिना, मरने को मजबूर ।
उम्मीदों की साइकिल, लगती चकनाचूर ।।
कैसे बोलूँ देश का, तुमने किया विकास ।
पीने को पानी नही, कौन बुझाए प्यास ।।
अख़बारों में तो हुईं, कई योजना पास ।
किंतु धरातल में हमें, उनकी आज तलाश ।।
चैत्र माह के मध्य से, गरमी हुई प्रचण्ड ।
बूँद बूँद व्याकुल हुआ, बुन्देलों का खण्ड ।।
नारी पनघट पे खड़ी, कहो कहाँ को जाय ।
बच्चे प्यासे हैं वहाँ, यहाँ खड़ी इक गाय ।।
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जय बुन्देलखन्ड......

   Over a month ago
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